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Showing posts from January, 2024

नशे

 शराबी मैं हुआ मेरी मर्ज़ी थी ,मरना सबको है सब दिन एक दिन  मैं  बदनाम यूँ  भी  नई बेकार , कुछ तो बदनामी कराती  होगी  जो  कराती है बदनाम  इज़्ज़त  को  इज़्ज़त  मैं  भी  मान  चूका  था , वो  आया  और  पर्दा  उठा  दिया अपने  को  अपना  मैं  भी  समझता  था  , खुदा  आया  और  आईना  दिखा  दिया शायरी  होती  नहीं  अच्छी  मुझजसे  बिना  नशे  के  , नशे  करूँ  तो  बुरा  हूँ  मैं इंसानियत  को  मोहबत मुझसे  भी  है  , दिक्कत  यूँ  है  की  ज़िंदा  हूँ  मैं